Breaking News: होमगार्ड विभाग में बड़ा खेल! पहले उपनल कर्मी को हटाया, फिर वापस लिया? मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की साजिश तो नहीं

Share the Post

देहरादून। होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में एक चौंकाने वाला प्रशासनिक उलटफेर सामने आया है। उपनल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंबिका सेमवाल को पहले सेवा समाप्त कर मूल विभाग वापस भेजने के महानिदेशक/कमांडेंट जनरल डॉ. पी0के0 प्रसाद ने आदेश जारी किए , लेकिन जिला कमांडेंट होमगार्ड्स देहरादून ने ठीक चार दिन बाद उन्ही से वार्ता का हवाला देते हुए अम्बिका सेमवाल को विभाग में बने रहने दिया।

क्या है पूरा मामला?

होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय, उत्तराखंड, देहरादून के पत्र संख्या सीजी-231/हो.गा./2024/1897 दिनांक 23 जून 2026 में महानिदेशक/कमांडेंट जनरल डॉ. पी0के0 प्रसाद, आई.पी.एस. ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंबिका सेमवाल की विभाग में आवश्यकता न होने के कारण उनकी सेवा समाप्त की जाए और उन्हें मूल विभाग उपनल को वापस भेजा जाए।

परन्तु आश्चर्य जनक तरीके से जिला कमांडेंट होमगार्ड्स देहरादून (निमल जोशी) द्वारा जारी पत्र संख्या डीसी10/एक-5/होगा/2026-27/57 दिनांक 30 जून 2026 में मुख्यालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अघोहस्ताक्षरित यानि महानिदेशक/कमांडेंट जनरल डॉ. पी0के0 प्रसाद, आई.पी.एस.से दूरभाष पर हुई वार्ता के बाद अंबिका सेमवाल को मूल विभाग उपनल वापस नहीं भेजा गया है। दोनों पत्रों में स्पष्ट विरोधाभास है। पहले मुख्यालय ने साफ-साफ आदेश किया फिर चार दिन बाद उन्ही के फोन वार्ता के बाद आदेश पलट दिया ? क्या यह सामान्य बात है या कोई बड़ा खेल चल रहा था ?

मुख्यमंत्री की छवि पर असर?

उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार एवं पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में होमगार्ड जैसे संवेदनशील विभाग में महानिदेशक/कमांडेंट जनरल डॉ. पी0के0 प्रसाद, आई.पी.एस. एक ऐसा आदेश देते है और फिर उसको वापस लेते है जब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंबिका सेमवाल की विभाग में आवश्यकता विभाग में नहीं है तो आदेश को वापस क्यों लिया गया ?

क्या यह घटना किसी साजिश का हिस्सा है जबकि 9 जून को माननीय उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता एवं एएजी द्वारा न्यायालय के समक्ष यह अंडरटेकिंग दी गई थी कि आवश्यक शासनादेश जारी कर दिए जाएंगे तथा 2 जुलाई को अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट के साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे। ऐसे में जबकि मामला न्यायालय में चल रहा है और पूर्व में कोर्ट द्वारा कुंदन सिंह केस जनहित याचिका संख्या 116/2018 में हाईकोर्ट की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जिन कर्मचारियों के नाम उपनल (UPNL) द्वारा प्रायोजित (स्पॉन्सर) किए गए हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का काल्पनिक (फिक्शनल) अथवा कृत्रिम (आर्टिफिशियल) सेवा-विराम (ब्रेक) न दिया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी कैबिंनेट ने हालही में उपनल कर्मियों बड़ी राहत दी है ऐसे में यह बड़ा सवाल है की क्या होमगार्ड विभाग में महानिदेशक/कमांडेंट जनरल डॉ. पी0के0 प्रसाद, बिना विभागीय मंत्री / विभागीय सचिव को जानकारी दिए बिना ऐसा फैसला ले रहे है जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है. यह आदेश को लेकर होमगार्ड विभाग में भी चर्चा का विषय बना है और उपनल संघ के अंदर भी रोष है।


Share the Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *