उत्तराखंड क्रांति दल का “संस्कृति बचाओ अभियान” जारी, जनसंपर्क व पदयात्रा में उठाए स्थानीय मुद्दे

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HamariChoupal

 

ऋषिकेश, 11 फरवरी: उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) द्वारा आयोजित “संस्कृति बचाओ अभियान” का दूसरा दिन जनसंपर्क और पदयात्रा के जरिए जोरदार तरीके से मनाया गया। यह अभियान ऋषिकेश के डायमंड होटल से शुरू होकर ऋषिकेश बाजार, ढालवाला, 14 बीघा, मुनि की रेती, तपोवन और शिवपुरी तक पहुंचा।

जनसंपर्क के दौरान राजेंद्र बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और मूल निवासियों के अधिकारों को संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के दो बिंदुओं पर विरोध जताया, जिनमें लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता और एक वर्ष के निवास के बाद स्थायी निवास प्रमाण-पत्र का प्रावधान शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन बिंदुओं को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो उक्रांद पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगा।

दिनेश नेगी ने गंगा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा का पानी अब आचमन योग्य भी नहीं रहा है। इसका मुख्य कारण नदियों के किनारे अवैध निर्माण और होटलों, रिसॉर्ट्स व कैंपों का अतिक्रमण है। उन्होंने प्रशासन से अवैध निर्माण पर कार्रवाई की मांग की और कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो उक्रांद स्वयं इन्हें तोड़ने का काम करेगा।

संजीव भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण का उद्देश्य यहां के निवासियों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए था, लेकिन 25 वर्षों के बाद भी यह उद्देश्य अधूरा है। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा, “उत्तराखंड कोई प्रयोगशाला नहीं है। हमारी संस्कृति को पाश्चात्य सभ्यता से दूषित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

टीकम राठौर ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि देवभूमि को “लिव-इन रिलेशनशिप” जैसे प्रावधानों से कलंकित न किया जाए। उन्होंने इसे युवाओं के नैतिक पतन और समाज में अव्यवस्था का कारण बताया।

पदयात्रा के दौरान शिवपुरी, गुलर और ब्यासी में जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जहां दर्जनों युवाओं ने उक्रांद की सदस्यता ग्रहण की। पदयात्रा तीनधारा होते हुए देवप्रयाग पहुंची, जहां संगम में आरती के साथ द्वितीय दिवस का समापन किया गया।

इस कार्यक्रम में संजीव भट्ट, दिनेश नेगी, प्रीति भूषण ममगाई, यशपाल नेगी, भोला दत्त चमोली, आकाश नौटियाल, राकेश चौहान, बृजमोहन सजवाण, विमला बहुगुणा समेत कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

उत्तराखंड क्रांति दल ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संस्कृति, पर्यावरण और मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।


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