देहरादून: एचआईवी संक्रमण छिपाकर शादी करने का आरोप, पत्नी की मौत के बाद शिक्षक पर मुकदमा दर्ज

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देहरादून: राजधानी देहरादून में एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सरकारी शिक्षक पर अपनी पत्नी से एचआईवी (HIV) संक्रमित होने की बात छिपाने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार, इस सच को छिपाने के कारण समय पर इलाज न मिलने से उसकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मृतका की बहन की शिकायत पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने आरोपी शिक्षक और उसके कुछ परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी है। आरोपी शिक्षक वर्तमान में पौड़ी गढ़वाल के थलीसैण क्षेत्र में तैनात बताया जा रहा है।

अस्पताल में जांच के दौरान हुआ खुलासा

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित महिला की तबीयत लगातार बिगड़ने पर उसे बीते 14 फरवरी को देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

  • महिला हुई संक्रमित: अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा की गई गहन जांच में महिला के एचआईवी (HIV) पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई।

  • जांच से बचता रहा पति: इस खुलासे के बाद डॉक्टरों ने महिला के पति (शिक्षक) और उनके बेटे की भी तुरंत एचआईवी जांच कराने की सलाह दी। आरोप है कि डॉक्टरों की बात सुनते ही आरोपी शिक्षक अस्पताल से गायब हो गया और जांच कराने से बचता रहा।

फर्जी रिपोर्ट भेजने और साथ छोड़ने का आरोप

शिकायतकर्ता (मृतका की बहन) ने आरोप लगाया है कि जब परिजनों ने जांच के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी शिक्षक ने व्हाट्सएप पर एक मेडिकल रिपोर्ट भेजी, जिसमें उसे ‘एचआईवी नेगेटिव’ दिखाया गया था। हालांकि, परिजनों को इस रिपोर्ट के फर्जी होने का गहरा संदेह है।

परिजनों का गंभीर आरोप: जब पीड़ित पत्नी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी, तब भी आरोपी ने उसका साथ नहीं दिया। वह गंभीर हालत में पत्नी को डॉक्टरों के भरोसे छोड़कर अपने गांव चला गया। सही समय पर संक्रमण की जानकारी न मिलने और उचित इलाज के अभाव में महिला की स्थिति बिगड़ती गई और गत 2 मार्च को अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने शुरू की जांच, मेडिकल रिकॉर्ड खंगाल रही टीमें

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रेमनगर थाना पुलिस पूरी तत्परता से साक्ष्य जुटाने में लग गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित होकर जांच की जा रही है:

  1. मेडिकल रिकॉर्ड का परीक्षण: पुलिस स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से मृतका के सभी मेडिकल दस्तावेजों और उपचार के रिकॉर्ड का परीक्षण करा रही है।

  2. व्हाट्सएप रिपोर्ट की सत्यता: आरोपी द्वारा व्हाट्सएप पर भेजी गई ‘नेगेटिव’ रिपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है कि वह वास्तविक थी या कूटरचित (फर्जी)।

  3. बयान दर्ज करने की प्रक्रिया: मामले से जुड़े सभी पक्षों, परिजनों और डॉक्टरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

प्रशासन की अपील: पुलिस प्रशासन ने इस मामले में आम जनता से अपील की है कि मामला बेहद संवेदनशील और तकनीकी है, इसलिए जांच पूरी होने और मेडिकल साक्ष्य सामने आने से पहले किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचें। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


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