पुरानी पेंशन बहाली के लिए ऐतिहासिक पैदल मार्च: संघर्ष, संकल्प और सफलता

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देहरादून, 24मार्च 2025(हमारी चौपाल )देहरादून से दिल्ली तक 260 किलोमीटर की ऐतिहासिक पैदल यात्रा पूरी कर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.पी. सिंह रावत ने इसे संघर्षों से भरा लेकिन ऐतिहासिक करार दिया। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर यह यात्रा 16 मार्च को देहरादून से प्रारंभ हुई और हरिद्वार, रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर होते हुए 23 मार्च की सुबह दिल्ली के जंतर मंतर पहुंची।

संघर्ष भरा सफर, मगर अडिग हौसला

बी.पी. सिंह रावत ने कहा कि देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों के लिए यह पैदल मार्च किसी परीक्षा से कम नहीं था। यात्रा के दौरान कई तरह की कठिनाइयाँ आईं—लंबा सफर, खराब मौसम, हाईवे पर पैदल चलने की चुनौती—मगर इसके बावजूद कर्मचारियों की हिम्मत नहीं डगमगाई।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा की प्रेरणा महात्मा गांधी की दांडी यात्रा से मिली, जो नमक कानून के खिलाफ थी। उसी तरह, यह यात्रा पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर थी। पूरे रास्ते कर्मचारियों और जनता का जबरदस्त समर्थन मिला, जिससे साफ जाहिर होता है कि इस मुद्दे पर लोग कितने जागरूक हैं।

“एक देश, एक पेंशन” की मांग

बी.पी. सिंह रावत ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ‘एक देश, एक संविधान’ और ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हैं, तो फिर ‘एक देश, एक पेंशन’ क्यों नहीं?” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसदों और विधायकों को एक दिन की सेवा के बाद पेंशन मिल सकती है, तो सरकारी कर्मचारियों को क्यों नहीं?

यूपीएस का विरोध, बड़े आंदोलन की तैयारी

रावत ने बताया कि 1 अप्रैल से केंद्र सरकार यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू करने जा रही है, जिसे कर्मचारी “एक और काला कानून” मान रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 85 लाख एनपीएस कार्मिक मोदी सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के लिए लामबंद हो रहे हैं।

जनता का अपार समर्थन

इस संघर्ष में जनता का भी भारी समर्थन मिला। रास्ते में कई जगहों पर लोगों ने पैदल यात्रा का स्वागत किया और इसे न्याय की लड़ाई बताया। युवाओं ने कहा कि अगर सांसदों और विधायकों को पेंशन मिल सकती है, तो सरकारी कर्मचारियों को क्यों नहीं?

पैदल यात्रा में शामिल प्रमुख साथी

इस ऐतिहासिक यात्रा में विक्रम सिंह रावत, सीताराम पोखरियाल, डॉ. आलोक यादव, अंकित रौथाण, परवीन घीड़ियाल, राजीव उनियाल, अभिषेक नवानी और लक्ष्मण सिंह साजवान सहित कई संघर्षशील कर्मचारी शामिल रहे।

निष्कर्ष:
पुरानी पेंशन बहाली की यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। बी.पी. सिंह रावत ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती। जंतर-मंतर पर कर्मचारियों का यह हुजूम सरकार को कड़ा संदेश देने के लिए पर्याप्त है कि अब वे किसी भी कीमत पर अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे।


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