October 16, 2026

उत्तराखंड एसटीएफ ने 15 दिनों में साइबर ठगी के 1.98 करोड़ रुपये बचाए, 1930 हेल्पलाइन से मिली मदद

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देहरादून। उत्तराखंड में साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों की धनराशि सुरक्षित करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) लगातार कार्रवाई कर रही है। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के अनुसार, अक्टूबर 2026 के पहले 15 दिनों में राष्ट्रीय साइबर वित्तीय हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के पीड़ितों की करीब 1.98 करोड़ रुपये की धनराशि बचाई गई है। इस दौरान शिकायतें मिलने पर संबंधित बैंक खातों में ठगी की रकम को होल्ड कराने के लिए तत्काल कार्रवाई की गई।

एसटीएफ के अधीन संचालित 1930 कंट्रोल रूम के माध्यम से साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य ठगी की रकम को दूसरे खातों में स्थानांतरित होने से रोकना और पीड़ितों को आर्थिक नुकसान से बचाना है।

कई जिलों में ठगी की रकम होल्ड कराई

एसटीएफ के अनुसार, 2 अक्टूबर को ऋषिकेश निवासी काश्मी शर्मा के साथ एपीके फाइल के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी कर 1.54 लाख रुपये ठग लिए गए। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 1,10,360.97 रुपये होल्ड कराए गए। वहीं, 4 अक्टूबर को रामनगर निवासी रितेश कुमार से ठगी गई 81,998.21 रुपये की पूरी धनराशि होल्ड कराई गई। इसी दिन पंतनगर निवासी देव सिंह के मामले में ठगी के 97,993 रुपये में से 66,409.92 रुपये होल्ड किए गए।

9 अक्टूबर को बनभूलपुरा निवासी मुजीरबुर्रहमन की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ठगी की 1,58,989 रुपये की पूरी राशि होल्ड कराई गई। इसके बाद 12 अक्टूबर को पटेलनगर, देहरादून निवासी इरशाद के साथ हुई 5.64 लाख रुपये की ठगी के मामले में पूरी धनराशि होल्ड कराई गई। इसी दिन खटीमा निवासी विवेक सिंह राणा के मामले में 1,96,343 रुपये की ठगी में से 1,32,532 रुपये और कालाढूंगी निवासी किशन नाथ की ठगी के 51,070 रुपये की पूरी राशि होल्ड कराई गई।

रामनगर निवासी नवीन चंद्र पांडे के साथ फेसबुक अपडेट नोटिफिकेशन लिंक के जरिए 3,67,391 रुपये की ठगी हुई थी। इस मामले में 2,25,648.41 रुपये होल्ड कराए गए। वहीं, 14 अक्टूबर को नेहरू कॉलोनी, देहरादून निवासी मनोज नौटियाल के साथ फोन अपडेट लिंक के माध्यम से 4,42,710 रुपये की धोखाधड़ी हुई, जिसमें 3,88,987 रुपये होल्ड कराए गए।

एसटीएफ के मुताबिक, 16 अक्टूबर को काशीपुर निवासी आदेश गुप्ता के साथ एपीके लिंक के जरिए 6.30 लाख रुपये की ठगी के मामले में पूरी धनराशि होल्ड कराने की कार्रवाई की गई।

बैंक खाते, ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करें

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने या किराये पर देने से बचें। एटीएम कार्ड, ओटीपी, पिन और यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें। यदि खाते में कोई अज्ञात धनराशि आती है, तो इसकी सूचना तत्काल बैंक या पुलिस को दें।

उन्होंने अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल पर सतर्क रहने और किसी अनजान व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत दस्तावेज साझा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाता है, तो घबराएं नहीं। कोई भी जांच एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती।

एसटीएफ ने लोगों को फर्जी वेबसाइटों, धनराशि दोगुनी करने के प्रलोभनों और निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से भी सावधान रहने को कहा है। साथ ही, गूगल पर खोजकर किसी भी अनजान कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। साइबर ठग अक्सर छोटे इनाम देकर लोगों का विश्वास जीतते हैं और बाद में उनसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए कहते हैं।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल

एसटीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि वित्तीय साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को संबंधित बैंक खातों में होल्ड कराने की संभावना बढ़ सकती है।


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